Gangubai Kathiawadi Movie Review

तो भैया ऐसा है आज हम देख के आये है पिक्चर “Gangubai Kathiawadi” एक ऐसी नारी जिसने वैश्यावृति को कानूनन हक़ दिलाने की लड़ाई लड़ी, जिसने इस पेशे में मौजूद हर उस महिला को, देश मे जीने वाले हरेक नागरिक के जैसे ही समान अधिकार दिलाने के लिए आवाज बुलंद की।

Gangubai Kathiawadi Review

तो भैया कहानी शुरू होती गुजरात के छोटे से कस्बे काठियावाड़ से जहाँ बैरिस्टर हरीजीवन दास की बेटी गंगा को मोहब्बत हो जाती है रमणीक बाबू से जो वहां पर अककॉउंट है।

गंगा Bollywood में हेरोइन बनाना चाहती है, देवानंद की बहुत बड़ी fan जो ठहरी। तो रमणीक अपने इश्क़ और उसके हेरोइन बनने के सपनों का फायदा उठाकर गंगा को बॉम्बे ले आता है और बेच देता है शीला मौसी को ,जो एक कोठा चालती है ‘कमाठीपुरा’ में।

उसे मजबूर किया जाता है शीला मौसी द्वारा अपनी सारी राते गिरवीं रखकर आये हुए ग्राहकों को खुश करने पर।

बेचारी गंगा को समझ आ जाता है कि अब वह इस दलदल से नही निकल सकती है , और इस तरह गंगा बन जाती है गंगू बाई।
एक बार गंगू बाई से ज़्यादती होने पर वह बॉमबे के डॉन रहीम लाला(Ajay Devgan) से न्याय के लिए जाती है और गंगू को न्याय तो मिलता ही साथ ही साथ लाला जैसा भाई भी।

Gangubai kathiawadi Movie की कहानी धीरे ध्धीरे आगे बढ़ती जाती है अपनी भावनाओं को समेटे समेटे। पर गंगू को समझ आता है कि कोठे पर काम करने से वह इस समाज का हिस्सा होकर भी समाज का हिस्सा नहीं है, उसे और कामतीपुरा में हर उस औरत को जो वैश्यावृति में है ,हेय दृष्टि से देखा जाता है।

बस फिर क्या है Gangubai, निकल पड़ती है समाज में अपने लिए हिस्सा मागने। और इसके लिए सबसे पहले उसको कंमातीपुरा प्रेजिडेंट कमेटि के इलेक्शन जीतने में लग जाती है, पर भइये जिस पिक्चर में twist एंड टर्न न हो तो Film कैसी?

यही पर एंट्री होती है ‘रज़िया बाई (विजय राज़)’ जो न तो नर है और न ही नारी, पर भैया है कमाठीपुरा में सब पर भारी।
वही प्रेजिडेंट है कामतीपुरा के सारे इलाके की।

फिर क्या , फिर वही फिल्मी ड्रामा कि दोनो में चुनावी मुकाबला होता है, गंगू अपने भाई रहीम लाला की मदद से चुनाव भी जीत जाती है और समाज मे अपने हक़ आवाज को बुलंद करने लगती है। पर शायद ये चुनाव जीतना ही पर्य्याप्त नही होता है, अगर आपको इस समाज का हिस्सा बनना है ।

उसके लिए आपको एजुकेशन की जरूरत है, ताकि कोठे पर आने वाली लड़कियों को शिक्षा मिल सके और उस दलदल से निकल सके। Gangubai भी अपनी लड़कियों के लिए दाखिले के लिए स्कूल मे जाती है पर स्कूल वाले कैसे एक कोठे वालो को स्कूल मे अडिमिशन देते?

वो कामतीपुर गली की लड़कियों को स्कूल से निकाल देते हैं और उल्टा कंमातीपुरा में रहने वाली गंगूबाई पर केस कर देते हैं कि कंमातीपुरा को खाली किया जाए क्योकि इस जगह से बच्चों पर गलत असर पड़ रहा है। इस बात को एक पत्रकार(फ़ैज़ी) हेडलाइन बनाकर एक पत्रिका में अच्छी से फ़ोटो के साथ छाप देते हैं।

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Gangubai अब फेमस हो जाती है। वह कोठे वाली से समाजसेवी बन जाती है लोग उसे सुनते हैं , उसकी हक़ वाली बात पर गौर करते हैं।

एक दिन फ़ैज़ी (पत्रकार) एक नेता पाटिल के साथ गंगू बाई से मिलने के लिए आते हैं,चुनाव का टाइम है ना भैया😂
और पाटिल गंगूबाई से समर्थन मागते है पर गंगुबाई बदले में प्रधानमंत्री जी से मिलने का इंतज़ाम कराने का प्रस्ताव रखती है। नेता हामी भर देता है।

फिर क्या था पाटिल चुनाव जीत जाता और वह अपना वादा निभाता है।
अगले सीन में गंगूबाई दिल्ली जा रही होती है उस वक्त के तत्कालीन प्रधनमंत्री ‘जवाहरलाल नेहरू’ जी से मिलने।

गंगूबाई नेहरू जी को वेश्यावृत्ति को कानूनन मान्यता देने का अनुरोध करती है और इस पेशे में होने वाले मानसिक और सामाजिक हानि के बारे मे बताती है। गंगूबाई प्रधानमंत्री जी को बताती है कि कैसे स्कूल वाले 4000 से ज्यादा वैस्यआयो को उनके घर से निकालने के लिए मजबूर कर रहे हैं और उनके बच्चो को भी पढ़ाने से मना कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री जी उसे एक कमेटी बनाकर उसे इस मामले में देखने का अस्वासन देते है।

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पिक्चर के आखरी 10 मिनटों में फ़ैज़ी, गंगुबाई को ‘महिलाओ के सामाजिक उत्थान’ के लिए हो रहे एक कार्यक्रम में वैश्याओं की तरफ से अपनी बात रखने के लिए आमंत्रित करते हैं। और गंगूबाई अपने जीवन की सबसे अच्छी स्पीच देती है कि कोठेवाली को समाज में जीने का हक़ है उनसे ये हक़ न छीना जाए। लोगो उसके भाषण पर तालिया बजाकर सम्मान देते है।

और भैया यही हुई जाता है पिक्चर का the end।

Acting In Gangubai kathiawadi Movie

तो मित्रों अब बात कर लेते हैं इस पिक्चर के किरदारों द्वारा निभाये गयी अदाकारी की।
सबसे पहले तो आलिया की लिए ज़ोरदार तालिया👏।अउर होनी बी चाहिए।
क्या एक्टिंग करी है भई बोले तो एक दम जबरदस्त ।

पूरी मूवी का केंद्र अगर कोई है तो वो है सिर्फ Alia Bhatt की एक्टिंग, एक दम लाज़बाब।
दूसरी तरफ Ajay Devgan भी लाला के किरदार से न्याय किया है उनका छोटा सा ही सही पर दमदार अभिनय का परिचय दिया है।
रज़िया के किरदार में Vijay Raj ने तो जान ही डाल दी है,

उनका एक डायलॉग ” मैं न तो नर हुँ न नारी पर हूँ सब पर भारी।” लोगो को सिनेमाघरों में सीटियां मारने पर मज़बूर कर देता है। बाकी के कलाकारों ने भी ठीक ठीक काम किया है ,जैसे सीमा पाहवा( शीला मौसी), जिम सराब( पत्रकार फ़ैज़ी) ने भी किरदार को जिया है।
तो ओवर आल एक्टिंग तो सबकी लगभग ज़बरदस्त है।

Direction , Dialouges and Cinemetography In Gangubai kathiawadi Movie

जैसा कि हम जानते हैं ही इसका निर्देशन Sanjay Leela Bhanshali ने किया है जो अपनी भव्य सेट्स के लिए जाने जाते है उनका निर्देशन बढ़िया है , सिनेमेटोग्राफी लाजबाव है। Eye कैचिंग सीन है। भन्साली जी ने इस फ़िल्म को रियल लाइफ से प्रेरित होकर बनाई है जिसकी कहानी आधरित है “Mafia Queen Of Mumbai” के “गंगुबाई कोठेवाली” पर जिसे S. Hussain Zaidi ने लिखा है।

My views On Gangubai Kathiawadi

पर मेरे नजरिये से भन्साली जी फ़िल्म के साथ न्याय नही कर पाए हैं, Movie में Gangubai का सिर्फ साफ सुथरा पक्ष ही दर्शाया है, पर माफिया वाली गंगूबाई तो हमको पिक्चर में कही भी दिखी नही।

कहानी भी लोगो को पहले हाफ तक तो बंधे सी रखती है लेकिन उसके बाद वो कही खो सी जाती है, लोग बोर होने लगते हैं।
और सबसे बड़ा ड्राबैक तो है इसका रुन्निग टाइम ढाई घंटे की है मूवी ये।

भंसाली जी इस फ़िल्म के साथ एक मेसज देने की भी कोशिश करते है पर उसके पीछे दिखाए गए लॉजिक तार्किक नही लगते हैं।
हाँ पिक्चर के डायलॉग जरूर अच्छे लिखे गए हैं जो दर्शकों को थोड़ा सा बांधे रखते हैं।

आपको सिनेमाघर में देखनी चाहिए या नही..

तो मित्रो अगर आप संजयलीला भन्साली के फैन है तो आपको ये फ़िल्म थोड़ी निराश कर सकती है।कयोंकि जिस तरह की फिल्में उन्होंने बनाई है शायद ये उस लेवल को मैच नही करती है कही से भी। लेकिन लेकिन लेकिन अगर

आप Alia Bhatt के ac है या फैन है तो आपको ये फ़िल्म जरूर देखनी चाहिए। और सिनेमाघरों में जाकर ही देखनी चाहिए , उनकी अदाकरी ही इस पिक्चर की जान है ।और मेरे ख्याल से तो Alia Bhatt ने अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है शायद इसमे।

तो ई है भैया हमारा ऑनेस्ट वाला रिव्यू😊✌️

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